यह कहानी सिर्फ़ दौलत की नहीं !
रोजाना 27 करोड़ दान !
साबुन और तेल बेचने वाले एक मुस्लिम बेटे ने खड़ी कर दी भारत की तीसरी सबसे बड़ी IT कंपनी…और रोजाना लगभग 27 करोड़ रुपये दान कर के इंसानियत की नई मिसाल कायम कर दी।
नाम है — अजीम प्रेमजी।
यह कहानी सिर्फ दौलत की नहीं… सोच की है।
जब लोग अमीरी मिलने पर महल, गाड़ियां और शानो-शौकत खरीदते हैं, तब अजीम प्रेमजी ने अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा गरीब बच्चों की पढ़ाई, स्कूलों की बेहतरी और समाज की तरक्की के लिए दे दिया।
उनके पिता एक साधारण कारोबारी थे, जो साबुन और तेल का व्यापार करते थे। उसी छोटे से कारोबार को अजीम प्रेमजी ने संभाला… लेकिन उन्होंने सिर्फ बिजनेस नहीं बढ़ाया, उन्होंने सपनों को हकीकत में बदला।
धीरे-धीरे वही कंपनी बनी — विप्रो।
एक ऐसी कंपनी जिसने भारत को टेक्नोलॉजी की दुनिया में नई पहचान दी।
लेकिन असली महानता यहां खत्म नहीं होती…
जब अरबों रुपये कमाए, तब उन्होंने पैसा अपने लिए नहीं रोका। उन्होंने कहा — अगर समाज ने मुझे इतना दिया है, तो लौटाना भी मेरा फर्ज है।
यही वजह है कि उन्होंने लगभग 2.06 लाख करोड़ रुपये समाजसेवा के लिए दान कर दिए। यह दुनिया के सबसे बड़े व्यक्तिगत दानों में गिना जाता है।
सोचिए…
जिस दौर में लोग थोड़ा पैसा देकर भी फोटो खिंचवाते हैं, उस दौर में एक इंसान चुपचाप रोजाना करोड़ों रुपये दान करता रहा।
अजीम प्रेमजी हमें सिखाते हैं कि असली अमीरी बैंक बैलेंस में नहीं… दिल की नीयत में होती है।
कुछ लोग पैसा कमाकर बड़े बनते हैं…
लेकिन अजीम प्रेमजी जैसे लोग पैसा बांटकर महान बन जाते हैं।
अगर दुनिया में ऐसे लोग बढ़ जाएं… तो शायद गरीबी, अंधेरा और मजबूरी खुद खत्म हो जाए।
Discussion 0 Comments
No comments yet. Be the first to share your thoughts!
Join the Conversation