वह दिन, जब क्रिकेट में हुआ खून-खराबा !
खिलाड़ियों के जघन्य अपराध !

वह दिन, जब क्रिकेट में हुआ खून-खराबा !

रक्त से लथपथ हो गए खिलाड़ी

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Admin ksbist1966
August 6, 2026 · 1 min read

आज क्रिकेट इतिहास का एक ऐसा काला और खौफनाक पन्ना खोलते हैं, जिसे पढ़कर आपकी रूह कांप जाएगी। यह कहानी साबित करती है कि एक महान कप्तान सिर्फ वो नहीं जो मैच जिताए, बल्कि वो भी है जो अपनी टीम के लिए सबसे बड़ा और कड़वा रणनीतिक फैसला (Tough Call) ले सके।

बात है अप्रैल 1976 के जमैका (किंग्स्टन) टेस्ट की। इससे ठीक पहले वाले मैच में टीम इंडिया ने 406 रनों का ऐतिहासिक लक्ष्य चेज़ करके वेस्टइंडीज़ को बुरी तरह हरा दिया था। वेस्टइंडीज़ का कप्तान क्लाइव लॉयड (Clive Lloyd) गुस्से में पागल हो चुका था। जमैका टेस्ट के लिए लॉयड ने स्पिनर्स को बाहर किया और अपने 4 सबसे खूंखार और जानलेवा तेज़ गेंदबाज़ों (Michael Holding, Wayne Daniel, Bernard Julien) को मैदान पर उतार दिया।किंग्स्टन की पिच पर घास थी और वह किसी कांच की तरह चमक रही थी। उस दौर में बल्लेबाज़ हेलमेट नहीं पहनते थे।और फिर शुरू हुआ क्रिकेट के मैदान पर असली खून-खराबा(Bloodbath)।


वेस्टइंडीज़ के गेंदबाज़ों ने क्रिकेट खेलना छोड़ दिया था। उनका सिर्फ एक ही लक्ष्य था हिंदुस्तानी खिलाड़ियों के सिर फोड़ना! वो लगातार बीमर (सीधे सिर पर आने वाली गेंद) और बाउंसर डाल रहे थे। अंपायर डर के मारे कुछ नहीं बोल रहे थे।

माइकल होल्डिंग की एक भयंकर बाउंसर अंशुमान गायकवाड़ के कान पर लगी। खून का फव्वारा फूट पड़ा और उन्हें सीधा अस्पताल ले जाया गया (उन्हें 2 दिन तक कुछ सुनाई नहीं दिया)।

गुंडप्पा विश्वनाथ की उंगली गेंद लगने से टूट गई।एक और गेंदबाज़ ने बृजेश पटेल के मुंह पर गेंद मारी, जिससे उनके होंठ फट गए और दांत टूट गए!

पूरी भारतीय टीम खून से लथपथ थी और अस्पताल जा चुके थे।vतभी कप्तान बिशन सिंह बेदी (Bishan Singh Bedi) ने लिया इतिहास का सबसे बड़ा और रणनीतिक फैसला भारतीय टीम का स्कोर था 97 रन और 5 विकेट गिर चुके थे। बचे हुए खिलाड़ी स्पिनर्स थे (खुद बेदी, चंद्रशेखर, वेंकटराघवन), जिन्हें बैटिंग नहीं आती थी।कप्तान बेदी को समझ आ गया था कि अगर उन्होंने अपने बचे हुए गेंदबाज़ों को बैटिंग करने भेजा, तो वेस्टइंडीज़ वाले उन्हें ज़िंदा नहीं छोड़ेंगे। एक कप्तान के तौर पर मैच जीतने से ज़्यादा ज़रूरी अपनी टीम को ज़िंदा वापस घर ले जाना था।

बेदी ने क्रिकेट के सारे नियम और ईगो ताक पर रख दिए और अंपायर को इशारा करके पहली पारी 97/5 के स्कोर पर डिक्लेयर (Declare) कर दी! 

ज़रा सोचिए, एक कप्तान ने टेस्ट मैच के पहले ही दिन अपने खिलाड़ियों को बचाने के लिए हार मानकर पारी घोषित कर दी थी!जब दूसरी पारी में भारत की बैटिंग आई, तो टीम का स्कोर महज़ 97 रनों पर ऑल आउट(All out) दिखा रहा था। जानते हैं क्यों?क्योंकि भारत के 5 बल्लेबाज़ अस्पताल में भर्ती थे और स्कोरकार्ड पर लिखा था—Absent Hurt(चोटिल होने के कारण अनुपस्थित)!क्रिकेट के 150 साल के इतिहास में यह इकलौता ऐसा टेस्ट मैच है जहाँ एक टीम के 5-5 खिलाड़ी खून से लथपथ होकर अस्पताल में थे और एक कप्तान ने अपनी रणनीति और समझदारी से बाकी टीम की जान बचाई थी!इस खौफनाक मैच के बाद ही क्रिकेट काउंसिल को समझ आया कि बाउंसर गेंदों पर नियम बनाने की ज़रूरत है। 

क्या आपको 1976 के इस खूनी टेस्ट और बिशन सिंह बेदी के इस महान फैसले के बारे में पता था?

. राहुल चौरसिया



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